रविवार, 31 मई 2015

उदासी

बहुत उदास है दिन
राते तो उदास ही है
काफी दिनों से
पर आगोश में नीद के
उदासी खो जाती है कही
पर दिन की उदासियाँ
और एकाकीपन
इनसे जूझना नहीं आता
अपने से भाग जाने की
कला नहीं सीख पाया मैं
अभिमन्यु की तरह
एक कला से महरूम
रह गया मैं भी
वो चक्रव्यूह तोड़ने को
था आतुर
और मैं तलाश रहा हूँ
कोई चक्रव्यूह
जिसमें एकाकीपन और
उदासी का एहसास न हो ।

सोमवार, 18 मई 2015

पहले हमसे यारी कर

पहले हमसे  यारी कर
मिल कर के गद्दारी कर
मैं  हारूं और  जीते  तू
ऐसी साज़िश भारी कर ।

मेरी आवाज में छिपी हुयी सिसकियाँ

लोगो को  मेरा मुस्कराता हुआ
चेहरा तो दीखता है
मेरी आत्मविश्वास भरी
और खनकती हुई
आवाज सुनाई पड़ती है
पर नहीं दिखलाई पड़ते है
आँखों की कोरो में फंसे हुए
खून के आंसू
और नहीं सुनाई पड़ती है
मेरी आवाज में
छिपी हुयी सिसकियाँ
सच है
जब तक आँखों से
अंगारे नहीं बरसते
और आवाज से
इन्कलाब  उठान नहीं लेता
कोई नहीं देख पाता है
और न सुन ही पाता है
किसी का दर्द और आंसू ।
इन्तजार कीजिये
बहरे कानो में सुनाई पड़ेगी गूँज
और उनकी आँखे भी देखने लगेगी
जो छुपा हुआ है अब तक वो भी ।

आप ने कभी कोई बाँध टूटता हुआ देखा है

आप ने कभी
कोई बाँध टूटता हुआ देखा है
शायद हाँ भी और ना भी
वैसे ही
कभी कभी फुट पड़ता है
इंसान पूरे वेग से
और बह जाता है
वर्षो से रुका हुआ पानी
और फिर
छा जाता है गहन सन्नाटा ।

सोमवार, 27 अप्रैल 2015

घूस नहीं दोगे तो कानून बता देंते है

घूस नहीं दोगे तो कानून बता देंते है
मुह माँगा दे दो तो कानून बना देते हैं

इस व्यवस्था में कोई भी काम हो जायेगा

इस व्यवस्था में कोई भी काम हो जायेगा
हाकिम की कीमत जान लो,जेब भारी हो
क्या गलत क्या सही ये तो किताबी बाते है 
हर कोई बिकने को तैयार है बस तैयारी हो ।

खुली अर्थ व्यवस्था की बयार क्या चली

खुली अर्थ व्यवस्था की बयार क्या चली
घर और दफ्तर सब ही दूकान हो गए |

शनिवार, 25 अप्रैल 2015

कोई मज़ार पर चादर चढ़ा वहां राजधर्म निभा रहा

कोई मज़ार पर चादर चढ़ा वहां राजधर्म निभा रहा
और कोई मंदिर जाकर वहां भी राजनीती चला रहा
पर जिसके कारण है आज किसी लायक बने हैं सब
उस दरिद्रनारायण के पास आज कोई नहीं जा रहा।

सोमवार, 23 मार्च 2015

जो तेरी छत पर बैठ गया वो मुझको मंजूर नहीं

जो तेरी छत पर बैठ गया वो मुझको मंजूर नहीं
चाहे वो एक परिंदा है पर मेरी छत तो से दूर रहे
तू मुसलमान मैं हिन्दू हूँ मेरा धर्म भ्रष्ट हो जायेगा
वो तेरी छत पर बैठा है तो तेरे धर्म को लायेगा
रे खबरदार तू रोक उसे उड़ने से पहले टोक उसे
या गंगाजल मुझे लाने दे पहले उसको नहलाने दे
बोला पक्षी कातर होकर तू किस किस को नहलाएगा
गंगा में वजू किया उसने और मैंने भी दुबकी मारी है
क्या गंगा को भी नहलाएगा या दूजी गंगा लायेगा
पानी ,धुप ,हवा और फसले,पक्षी ,गाय भैंस की नस्ले
इनमे हिन्दू पहचान जरा तय कर दे मुसलमान जरा
लहू का मजहब तय कर दे किरणों में अपने रंग भर दे
सारे ग्रंथो को पढ़ के बता तेरे इश्वर की जाति है क्या
तू अज्ञानी टोकेगा क्या उड़ने से तू रोकेगा क्या
प्रकृति जब खेल दिखाएगी तू खुद कही उड़ जायेगा
किस जगह गिरेगा तू जाकर क्या तू बतला ये पायेगा
खुद का तुझको कुछ पता नहीं तू दुनिया को क्या साधेगा
अपनी सांसो का पता नहीं तू प्रकृति को क्या बांधेगा
सबको स्वतंत्र ही जीने दे ये नदिया सूरज सब सबके है
ये पृथ्वी जंगल और पहाड़ सब तूने नहीं बनाये है
ये इतने थलचर और जलचर सब तूने नहीं बसाये है
इनमे से तू भी एक अदद ये सब है तब ही तू भी है
ये आसमान भी सबका है ये विधि विधान भी सबका है
सब तेरे है तू सबका है गर इतना तू पहचान  गया
तू भी कुछ पल का किस्सा है बस इतना ही तू जान गया
तो अमन चैन छा जायेगा दुनिया खुशहाल बनाएगा
तो अब बस तू इंसा बन जा नफरत की मत बीन बजा
आ दुनिया को खुशहाल करे बस प्रेम से मालामाल करे ।
तेरी छत या उसकी छत सब झटके में गिर जाती है
जब पृथ्वी करवट लेती है उसकी छाती फट जाती है
तू देख चूका तब क्या होता सब वही दफ़न हो जाते है
सब जाति धर्म या धन दौलत सब के सब मिट जाते है ।

रविवार, 15 फ़रवरी 2015

हाँ मैं खुली किताब हूँ

हाँ मैं खुली किताब हूँ
जिसके अक्षर
वक्त की बारिश ने धो दिए है ।
कैसे पढ़े कोई
हाँ तुम खुली किताब हो
पर उसकी लिपि  मुझे पढनी नहीं आती
तो हम पढ़े कैसे  किताबे खुली है और
हवा में फड़फड़ा रहे है
इसके पन्ने  उड़ जाने को आतुर
पर नियति के धागों ने
कस कर पकड़ रखा है
और खुली किताबे खुली होकर भी
अनबूझ और अपठनीय है
अपनी नियति और जिंदगी की तरह ।

अपने के नाम पत्र ---

अपने के नाम पत्र ---

आप खुश है न
आप जैसा छोड़ कर गए थे
अपने हो या घर हो या सपने
मैंने सम्हाल कर रखा है न
आप तो नहीं हो सकता था मैं
पर कोशिश तो किया सामर्थ्य भर
बड़ी जैसे बाकी दो की माँ हो गयी है
और छोटी ने घर को घर बना रखा है
बेटा हम सबका सहारा हो बन गया है
बेटियों की शादी होने वाली है
बस यही समाचार नया है
एक की तय हो गयी है
बहुत अच्छा बेटा और परिवार है
दूसरे की भी शायद जल्दी हो जाएगी
आप की दोनों बेटियाँ अपने घर जायेंगे
आप ने जो संस्कार दिए और व्यवहार
उससे ये अच्छा घर बनायेंगी
समाज को आप की ही तरह रास्ता दिखाएंगी
हां हां फिर आप का बेटा भी बहू लायेगा
पर आप की जगह तीनो को
रास्ता कौन दिखायेगा
आप ने कहा था न की अच्छी तरह रहिएगा 
तो मैं बहुत अच्छा हूँ और अच्छा ही रहूँगा
कोई तकलीफ होगी तो आप से कहूँगा
आप खुश है न
कुछ गलत तो नहीं हो रहा है न
जहा है वही से बच्चो को आशीर्वाद दीजिये
और रास्ता दिखाइएगा
हाँ जब शादी हो तो बच्चो पीछे बैठ जाइएगा
आप ने कहा था हर वक्त आसपास ही रहेंगी
पर ये नहीं पता की जो माँ समझाती है
वो आप बेटियों से कैसे कहेंगी
कन्यादान तो दोनों करते है न
मैं अकेले कैसे करूँगा
आप ने बताया ही नहीं
कि अपनी जगह कन्यादान को किसको कहूँगा
अच्छा आप आराम करिए सब हो जायेगा
आप का संबल रास्ता दिखायेगा
अब जिस दिन बेटियां विदा हो जाएँगी
तब अकेले में हम दोनों खूब बातें करेंगे
फोटो देख देख खुश होंगे और
कुछ ऐसा भी तो होगा जिस पर
पहले की तरह देर तक हँसेंगे
आप खुश हैं ना |
तो आज के लिए बस इतना ही |

आप खुश तो हाँ न
देखिये जो करने लॉयक था
उससे भी अच्छा किया मैंने
कहा से किया
आप जाने दीजिये न
बताइये आप खुश तो हैं न
कैसी है आप की बेटियां
सब अच्छा लग रहा है न
मैं अकेला !
वो तो ईश्वर ने तय कर दिया था
आप को बुला कर
और मुझे अकेला बना कर
अच्छा ज्यादा बात नहीं कर सकता
जुबान के साथ हाथ भी रुंध रहा है ।










शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2015

मजबूत हो गर आप चाहे जो खरीद लो

मजबूत हो गर आप चाहे जो खरीद लो
कलम हो जुबान हो या फिर जमीर हो ।

अंदाज क्या है लोगो की आशिकी का
गुलों की बात करते गोली  मार देते हैं ।

इतने झूठ बोल कर अपना बनाये रखना
बाजीगरी है कैसी और क्या खूब हुनर है ।

ना मैं थकूंगा न मैं हरगिज झुकूँगा

ना मैं थकूंगा न मैं हरगिज झुकूँगा
खुशफहमी न पालो नहीं मैं रुकुंगा
न जाने कितने झंझावातो को देखा
कितनी कठिन दिन रातो को देखा
न पहले रुका न अब मैं रुकुंगा
न पहले थका न अब मैं थकूंगा ।
चोटी  पर चढ़ कौन बसता वहां है
समन्दर में जा कौन रुकता वहां है
मैं भी सैलानी हूँ मैं क्यों बसूँगा
मेरा भी सफ़र है मैं क्यों रुकूंगा
ये जीवन है जब तक चलते ही जाना
आसमा पर उड़ना जमी पर भी आना
अंतिम सफ़र आसमा पर बसूँगा
जमी घूम ली तो यहाँ क्यों रुकूंगा
इश्वर होने की ग़लतफ़हमी है तुमको
मैं इंसा हूँ  खुद पर भरोसा है मुझको
हैं मेरे पांव अपने मैं उनसे चलूँगा
न पहले रुक था न अब मैं रुकुंगा
कोई खुद को भगवान माने तो माने
अपनी सारी शक्ति मुझ पर ही ताने
ऐसी शक्ति से मैं न हरगिज डरूंगा
न पहले रुका था न अब मैं रुकुंगा ।

गुरुवार, 27 नवंबर 2014

चलो नया इतिहास बनाये

चलो नया इतिहास बनाये
घूमे घामे .और पीये खाएं
चलो नया इतिहास बनाए
बस भाषण दे राशन खाए
चलो नया इतिहास बनाये
बस प्रचार का ढोल बजाये
चलो नया इतिहास बनाये
कुछ न करना ढोंग सजाए
चलो नया इतिहास बनाये |

मेरी शाम की रंगीनी से डर कर तू मुझे छोड़ गयी

मेरी शाम की रंगीनी से डर कर तू मुझे छोड़ गयी
पर दुःख इस बात का है कि बोतल भी तोड़ गयी ।

बुधवार, 1 अक्टूबर 2014

जिंदगी भी क्या है --

जिंदगी भी क्या है --
धीरे धीरे सब चले जायेंगे
और मैं अकेला हो जाऊँगा
फिर
एक दिन मैं चला जाऊँगा
और सब अकेले हो जायेंगे

हवाए देख कर कितनो ने हम पर धूल फेकी है

हवाए देख कर कितनो ने हम पर धूल फेकी है
हमने बस पीठ फेर ली यारो तो बुरा मान गए ।

शुक्रवार, 12 सितंबर 2014

जब चाहो तुम किसी का भी दिल तोड़ दो मालिक हो

जब चाहो तुम किसी का भी दिल तोड़ दो मालिक हो
जब चाहो किसी का भी मुकद्दर फोड़ दो मालिक हो
जब चाहो आसमान पर उडो या जमीन पर झांक लो
जब चाहो तुम जिससे नाता जोड़ लो तुम मालिक हो |

मंगलवार, 26 अगस्त 2014

कोई सवाल मत कर बस तू जिंदाबाद बोल

कोई सवाल मत कर बस तू जिंदाबाद बोल
कोई बवाल मत कर बस तू जिंदाबाद बोल
पेट  रख दे किसी सिद्धांत की किताब में तू
भूख ,ख्याल मत कर बस तू जिंदाबाद बोल |

वो समझते है कोई एहसान किये बैठे है

वो समझते है कोई एहसान किये बैठे है
दरअसल हमारा ही सामान लिए बैठे है |
हम तो लुटते रहे हर वक्त हर चौराहे पर
वो हर चौराहे पर ही दूकान लिए बैठे है |
हम बने सीढियां तो मीनार तक वो पहुचे
हम सीढ़ी रह गए वो भगवान् बने बैठे है |
बड़े बड़े थे वादे सबकी कहानी बदलेगी
हम पत्थर भी नहीं वो भगवान बने बैठे है |
लावारिश होते कई लोगो को हमने देखा है
स्वयंभू भगवान आज बे पहचान बने बैठे है |

इतना भी मत इतराओ की आज सूरज हो
सब दफ्न होते है वो शमसान हमने देखा है |
हमारा क्या जमी पर गिर के वही रह जायेंगे
आसमां से गिरे को लहूलुहान हमने देखा है |
कर सको तो नीव की ईंटो की भी क़द्र करो
वर्ना जमीदोज होते कई मकान हमने देखा है |


रविवार, 24 अगस्त 2014

एक चापलूस ने एक सरकार को जमीदोज किया

एक चापलूस ने एक सरकार को जमीदोज किया
लोग कहते है बहुत ख़ास है हमेशा साथ रहता है ।

मैं मर भी जाऊं तो क्या होगा

मैं मर भी जाऊं तो क्या होगा
शायद अगर हुआ तो
चार कंधे
कुछ लकड़ियाँ
और आग के शोले
कुछ क्षण की
कुच्छ सिसकियाँ
कुछ कहानिया
कुछ शिकायतें
कुछ झूठी अच्छाइयां
बहुत सी बुराइयाँ
क्या किया जीवन में
बेकार था कुछ न किया
जिम्मेदारियां भी छोड़ गया
नालायक था कुछ नहीं किया
बार बार बोर होकर भी
दोहराई जाती वही कहानियां
उठावनी हो गयी
घर वालो का बोझ कुछ कम हुआ
लो तेरही भी आ गयी
ये भी खर्च कवाएगी
कोई रिश्तेदार रुक न जाये
चलो सब चले गए
अब देखो कहां क्या क्या है
बाट लो किसका क्या है
और
चल पड़ेगी जिंदगी
अपने अपने रस्ते पर
एक कोने में टंगी तस्वीर
साल में एक बार शायद
बदलेगी माला
और हाथ जोड़ कर भागते हुए लोग
आज तो देर हो गयी इस चक्कर में
पता नहीं क्यों बने है ये रिवाज
इसलिए
मेरे लिए मेरी वसीयत है
की
कोई नहीं रोयेगा
बिजली में जला देना मुझे
किसी नदी में नहीं बहाना मुझे
मैं नहीं मानता कोई पूजा इसलिए
न कोई पूजा और न उठावनी तेरही
अगले ही पल से सब खुश रहो
और अपनी जिंदगी जियो
मेरे लिए न कभी कोई पारेशान हुआ
न किसी को होना है
वर्ना मैं परेशान हो जाऊंगा
कुछ नहीं है मेरे पास
की कोई लडे की किसका क्या
बस मेरी यादे कभी क्रोध लायेंगी
की नालायक बाप ने कुछ नहीं किया
यही मेरी वसीयत है ।
मैं चला जाऊंगा तो भी
कुछ नहीं होगा
सब जैसे था वैसे ही चलेगा ।
बस मेरा आशीर्वाद ही मेरी वसीयत है
जो किसी काम नही आएगी
इसलिए मैं रहूँ या न रहूँ
कोई फर्क नहीं पड़ता
दुनिया ऐसे ही चलती है ।
और मैं भी चुपचाप ऐसे ही चला जाऊंगा
शायद लावारिश होकर
की किसी को कोई कष्ट ही न हो ।

बुधवार, 16 जुलाई 2014

अन्दर इतना तूफ़ान सा क्यो है

अन्दर इतना तूफ़ान सा क्यो है
मन इतना परेशांन सा क्यो  है
न कोई बात है,न कोई भाव ही
दर्द इतना मेहरबान सा क्यो है |

दर्द मन में,दिमाग में,लहू में भी
दर्द तन में,दिल औ वजूद में भी
दर्द साँस ,धड़कन औ रूह में भी
ये दर्द हुआ आसमान सा क्यूं है |







शनिवार, 12 जुलाई 2014

लो अब मैं चला तुम खुश तो हो

लो अब मैं चला तुम खुश तो हो
आज सूरज ढला तुम खुश तो हो
देखो बंद हुयी मेरी जुबान आज
बोलने से परेशांन थे खुश तो हो|

सच दो लफ्ज और झूठ भारी है
झूठ हुआ आसमान खुश तो हो
झूठ और लुट तुम्हारे मेहमान है
और जनता बेजुबान खुश तो हो|

ये आदमी नागिन बन गया यारो
नाग है परेशांन तुम खुश क्यों हो
मैं चला तुम्हारी दुनिया छोड़ कर
न जहर न एहसान तुम खुश तो हो

रविवार, 15 जून 2014

जहा केवल एक कमाता हो बाकी सब केवल खाते और फैलाते हो

जहा केवल एक कमाता हो बाकी सब केवल खाते और फैलाते हो
कितना भी भरा पूरा घर हो और हो आमदनी उसे कौन बचाएगा |

ईमानदारी वफ़ादारी और शर्म कही मैं टांग आया हूँ

ईमानदारी वफ़ादारी और शर्म कही मैं टांग आया हूँ
तेरी मेहनत तेरी कुर्बानिया मेरे किस काम आएँगी |

तू मेहनत कर संघर्ष कर और सरकार बनाता जा
मैं खाता जाऊंगा तेरी खेती बस तू हल चलता जा |

इरादे देख कर तेरे अब चौकन्ना हो गया हूँ मैं

1-इरादे देख कर तेरे अब चौकन्ना हो गया हूँ मैं
  या तू  मुझको मरेगा या अगला युद्ध हारेगा |


2-छल एक जीत दे सकती पर स्थाई नहीं होती
  टिकने के लिए तो सबका ही विश्वास चाहिए |


3-अभिमन्यु को मारा था तो क्या युद्ध जीता था
   कभी कुछ भेडिये मिल कर शेर को भी मार देते है


4-जितने लोग तेरे यहाँ व्यापार करते है ,
    उतने तो हमारे सीमा पर कुर्बान होते है | 

5-जितना तूने सबका खून बहा दिया  ,
  उससे कई गुना हमने दान कर दिया  | 

6-जितना तेरे घर में सब कुछ होता है ,
   उतना तो हम खेत में ही छोड़ देते है | 

७- लकीरें साथ है जिनकी जब तक
    बुरे करम भी नहीं मार सकते है |  

शनिवार, 31 मई 2014

मौन मेरा कैसा लगेगा दोस्तों औ दुश्मनों को

मौन मेरा कैसा लगेगा दोस्तों औ दुश्मनों को
मैं जब मौन हो जाऊंगा तभी सब जान पावोगे
न हम होंगे न शब्द होंगे न भाषण और बहस
न दिखलायी पडूंगा तब हमें पहचान जाओगे |

शनिवार, 24 मई 2014

कोई जिंदगी से क्या गया कि नीद भी साथ ले गया ।

१-कोई जिंदगी से क्या गया
  कि नीद भी साथ ले गया ।


२-
कहा हो तुम कहते थे, अब कोई नहीं
पर देखो लोग तुमसे मुझे छीन रहे है ।


३-

देखो हमारी अनुभुतियां बड़ी हो गयी
मैं ,तुम नहीं पर पैरो पर खड़ी हो गयी ।


४-

देखो ये आँखों का पानी आंसू तो नहीं है
कुछ गिर गया इसमें और बह रहा है वो ।


५-

मैं सोने की कोशिश करता हूँ, तुम्हे भूलकर
तुम्हे गलतफहमी है की तुम ही मेरी नीद हो ।


६-

साथ चलने का वादा गर दोनों ने ही निभाया होता
तो चिता दोनों की ही ज़माने ने साथ सजाया होता ।


७-

दोनों साथ गए होते दोनों ही साथ रोते
अनुभूतिया मिट जाती जिंदगी को ढोते ।


८-

देखो मजाक बहुत हो गया तुम कहा हो अब आवाज तो दो
मैं तो वही हूँ जहा तुम छोड़ गए थे अपनो के साथ देखो तो ।


९-

मैं अब हार रहा हूँ कर्त्तव्य निभा नहीं पाया
अकेला हो अपनों को राह दिखा नहीं पाया ।


१०-

अच्छा थक गए न अब तुम आराम करो
अपनी सारी तकलीफे मेरे ही नाम करो ।


गुरुवार, 20 मार्च 2014

कह देता हूँ किसी से कि जरा हाथ बढ़ाना

कह देता हूँ किसी से कि जरा हाथ बढ़ाना
नासमझ मुझको अपाहिज ही मान लेते हैं ,
मान कर कमजोर मुझको वे उपदेश देते है
अज्ञानी मान कर मुझको पूरा ज्ञान देते है | 

मेरी आँखे गीली क्यों है ?

मेरी आँखे गीली क्यों है ?
और
नदी क्यों बहने लगी  ?
गलत न समझ ले आप
मैं कभी नहीं रोता हूँ
कभी नहीं रोया हूँ मैं
और
क्यों रोऊँ मैं
मेरी आँखों में पानी ही
बहुत ज्यादा है
बस छलक पड़ता है वो
जब भारी हो जाता है मन
और बैठने लगता है दिल
तो छलक पड़ता है
आँखों का खारा पानी
सच रोता नहीं हूँ मैं ।

शनिवार, 8 फ़रवरी 2014

मैं रबड़ का पेड़ हूँ कितना गिरा दो और दबा दो

मैं रबड़ का पेड़ हूँ कितना गिरा दो और दबा दो
नहीं होगी मौत मेरी फिर से मैं खड़ा हो जाऊंगा |

अपने जुल्म और हमारे इश्क की ये इन्तहा देखो

अपने जुल्म और हमारे इश्क की ये इन्तहा देखो
की मर गया मैं पर खुली आँखे तुम्हे तलाश रही |

देखना मुझ पर हमला कौन करता है

देखना मुझ पर हमला कौन करता है

अपनों की जेब में ही हैं खंजर छुपे हुए ।

तुम्हारे प्रेम में बर्बाद हो गया है कौन

तुम्हारे प्रेम में बर्बाद हो गया है कौन
कोई चिंता नहीं बंसी बजा रहे हो तुम |

मैं एक पत्ता नहीं हवा में उड़ा दे कोई

मैं एक पत्ता नहीं हवा में उड़ा दे कोई
जमीन में धंसी मेरी जड़े इमान की,
होगी उनके पास ताकत शैतान की
पर मेरे पास है इंसानियत इंसान की |

मैं हमेशा दरवाजा खुला रखता हूँ अपना

मैं हमेशा दरवाजा खुला रखता हूँ अपना
जाने कब कोई हवा का झोका आ जाये ।

शनिवार, 14 दिसंबर 2013

मैं ढूंढ रहा हूँ खुद को

मैं ढूंढ रहा हूँ खुद को
कुछ दिनों से
पर भटक जाता हूँ
रास्ता तलाश करते करते
केवल अँधेरा हाथ आया है
अब तक
अँधेरे में रास्ता नहीं दीखता
तो कैसे ढूंढ मैं खुद को
रास्ता तलाश करते करते
कितनी बार गिरा मैं
और कितनी बार टकराया हूँ
पता नहीं किस किस चीज से
सर फूट गया है टकरा कर
बह रहा है खून लगातार
केवल सर क्यों ,यहाँ तो
अंग अंग घायल हो गया है
और
दिल तो छलनी हो गया है
मन और अस्तित्व
विलीन हो गए है
कही अनंत में
और मैं ,मैं हूँ ही कहा
मुझे तो ख़त्म कर दिया है
मेरे बहुत अपने ने
तो क्या ढूँढना खुद को
बस घिसट रहा हूँ
अपनी लाश लिए
अब
अपनी लाश के बोझ ने भी
थका दिया है बुरी तरह
नहीं चल पाउँगा और
अपने पैरो पर
पर कोई कंधे भी तो नहीं
जिनका सहरा मिल जाये
या जिनपर लद कर जाऊं मैं ।

सोमवार, 4 नवंबर 2013

नहीं जन्म ले रही है कविता कई दिनों से

नहीं जन्म ले रही है
कविता कई दिनों से
कलम चलती ही नहीं
दिल सूख गया है
कोई हलचल नहीं होती
तो कैसे जन्म ले कविता
कुछ नहीं सूझता अब
लगता ही नहीं कि कुछ जीवन है
और
उसमे कुछ करना भी है
जैसे एक बड़ा ह्रदय आघात
ख़त्म कर देता है सब कुछ
वैसे ही किसी आघात ने
ख़त्म कर दिया है मुझे
और जो ख़त्म ही हो गया
उसकी कैसी हलचल ,क्यों हलचल
बस जिन्दा लाश के सामान
घिसट रहा हूँ बस समय पूरा करने को
तो कहा से कविता पैदा होगी
और कैसे चलेगी कलम ।

मेरी हुंकारों से तुझमे , जोश नहीं आया है क्या

मेरी हुंकारों से तुझमे , जोश नहीं आया है क्या
धनुषी टंकारों से तुझमे जोश नहीं आया है क्या
क्या मैं टेरू अर्जुन को कि गांडीव तुझे पकड़ा जाये
क्या कर्ण का कवच कुंडल ही है तुझको ललचाये 
क्या परशुराम का फरसा ही तुझको अब ताकत देगा
जिससे समुद्र डरा था क्या वो तीर तुझे हिम्मत देगा
क्या चन्द्रगुप्त को ले आऊं मैं तेरी युद्ध कहानी में
चाणक्य और द्रोनाचार्य भरे अब जोश तेरी जवानी में
तू कब उठ कर ललकारेगा बतला अब अर्जुन वीर मुझे
तू दुश्मन को कब मरेगा बतला अब अर्जुन वीर मुझे
तेरी सेना खड़ी तो हुयी गांडीव की टंकार सुनेगी कब
तू कब शंख को फूंकेगा युद्ध की ललकार सुनेगी कब
कब समझेगा युद्ध न्याय का न्याय सभी को देने को
सामने जितने अन्यायी हैं सबको अंतिम गति देने को
तुझको ईश्वर ने भेजा है और जनता ने ये ताकत दी हैं
अब अपना वचन निभाना है सबका कर्जा लौटना है
चल अर्जुन अब मोह छोड़ चल अब गांडीव उठा ले तू
बस जीत का लक्ष्य सामने और इसको लक्ष्य बनाले तू
फिर निश्चित जीत तुम्हारी है हर बाधा तुमसे हारी है
इस बार तुम्हारी बारी है और अब आगे की तैयारी है
अब देख तेरा जयगान यहाँ तेरा है कितना मान यहाँ
कुछ ऐसा कर जा तू अब तो बस तेरा हो सम्मान यहाँ
थोडा कठोर बन जा अर्जुन बस थोडा जोर लगा अर्जुन
फिर हर तम तेरे से हारेगा ,तू हर दुश्मन को मरेगा
लोगो का हक़ दिलवाएगा और आगे बढ़ता जायेगा ।



ये दिया है पर सूरज को भी ललकारेगा

ये दिया है पर सूरज को भी ललकारेगा
अँधेरा हो कैसा भी पर ये उसको मारेगा 

मंगलवार, 3 सितंबर 2013

कुछ खास नहीं है सब आम हो गया

कुछ खास नहीं है सब आम हो गया
आदमी था काम का बेकाम हो गया ।

वो तो आये ही थे बस हाल पूछने मेरा
और मैं तो मुफ्त में बदनाम हो गया |

शुक्रवार, 2 अगस्त 2013

क्या किसी ने भैंसे पर आने वाले मौत के देवता को देखा है ?

क्या किसी ने भैंसे पर आने वाले
मौत के देवता को देखा है ?
क्या किसी ने रावण को या
कंस को देखा है ? नहीं !
पर मैंने तो सबको देखा तो नहीं
पर महसूस किया है हर वक्त
अपने आसपास
और बहुत कोशिश कर भी
इनसे पीछा नहीं छुड़ा पाता हूँ मैं
मैं इनसे दोस्ती करता हूँ
ये मुझे काट लेते है बहुत जोर से
मैं इनसे भागता हूँ
ये मेरा पीछा नहीं छोड़ते हैं
और लगातार
मेरे पीछे जासूस लगाये रखते है
और मौका ढूँढते रहते है की
कब मै जरा सा गाफिल हो जाऊं
और ये मौत बन कर दबोच लें मुझे
कभी देखा है आप ने किसी की मौत को
इस तरह पीछा करते,नहीं ना
तभी तो मैं सबसे अलग हूँ
खुश रहो दुश्मन दोस्तों
क्योकि तुम अमर हो, अजर हो
तुम ही तय करोगे ,पृथ्वी का ख़त्म होना
तुम ही तय करोगे,इंसान की किस्मत
और तुम ही तो तय करोगे
अन्तरिक्ष की  व्यवस्था
कितने महान हो तुम
ये समय तय करेगा