थोड़े से गम है तो क्या मुस्कराना छोड़ दे
रास्ते मे कांटे है तो क्या आना जाना छोड़ दे
शोर बहुत है कमजर्फ लोगो के धोखो का
क्या जिंदगी अब यमन राग गाना छोड़ दे ।
चेहरे पर उसके गुस्ताखियों की धूल है
हमसे कहते है कि आईना दिखाना छोड़ दे
पीठ पर हमारे पैबस्त है ख़ंजर हजार
चाहते है हमसे कि हम चिल्लाना छोड़ दे
घाव से मेरे दर्द और लहू इतना बह रहा
फिर भी चाहते है कि मलहम लगाना छोड़ दे