मंगलवार, 13 जनवरी 2026

थोड़े से गम है तो क्या मुस्कराना छोड़ दे

थोड़े से गम है तो क्या मुस्कराना छोड़ दे 
रास्ते मे कांटे है तो क्या आना जाना छोड़ दे 

शोर बहुत है कमजर्फ लोगो के धोखो का 
क्या जिंदगी अब यमन राग गाना छोड़ दे ।

चेहरे पर  उसके गुस्ताखियों  की धूल है 
हमसे कहते है कि आईना दिखाना छोड़ दे 

पीठ पर  हमारे पैबस्त है ख़ंजर हजार 
चाहते है हमसे कि हम चिल्लाना छोड़ दे 

घाव से मेरे दर्द और लहू इतना बह रहा 
फिर भी चाहते है कि मलहम लगाना छोड़ दे 


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