पहचान उन सभी का मंच है जो जिंदगी को जीते नहीं जीने का निर्वाह करते है .वे उन लोगो में नहीं है जिन्हें जीवन मिला है या जीने का मकसद उनके साथ रहता है .बस जीने और घिसटने के बीच दिल वालो की कलम से और दिल से जो निकल जाता है वही कविता है .पहली कविता भी तों आंसू से निकली थी .आंसू अपने दर्द के हो या समाज के ,वे निकलेंगे तों कविता भी निकलेगी और वही दिलवालो की ;पहचान ;है
रविवार, 27 फ़रवरी 2022
युद्ध की खेती
युद्ध खत्म होगा
बुधवार, 23 फ़रवरी 2022
जीवन मृगमरीचिका है
सोमवार, 14 फ़रवरी 2022
हैपी वलेंटाइन डे
शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2022
खुद की लाश ढोना
गुरुवार, 3 फ़रवरी 2022
ये दिल हुवा वीरान सा क्यों है ।
मंगलवार, 11 जनवरी 2022
ये आदमी है या पिटठू ?
मर जाने का पर कुछ नही बताने का ।
कन्धे पर बोझ
शनिवार, 8 जनवरी 2022
जाति का नशा
गुरुवार, 30 दिसंबर 2021
उतना अघाते है ।
मंगलवार, 28 दिसंबर 2021
देश को कायर बना दो
शनिवार, 25 दिसंबर 2021
इंतज़ार है इंतज़ार है इंतज़ार है
बहुत दिनो से
और सोचने मे क्या जाता है
पिछले कई दिनो से
मंगलवार, 14 दिसंबर 2021
जवाब तुम दोगे
शरीर बेईमान है
गौरव के साथ चलते रहो ।
रविवार, 12 दिसंबर 2021
रिश्तो की डाल
शनिवार, 4 दिसंबर 2021
कल हो या न हो
बदबू न आये और कुत्ता वफादार रहे
अपने हिन्दूस्तान के लिये उठो
बुधवार, 1 दिसंबर 2021
जो आये थे भिखारी बन कर मुझसे मांगने
जो आये थे भिखारी बन कर मुझसे मांगने
मैं देखता रह गया वो मुझे कंगाल कर गया
वो घिसी चप्पल में कितना मजलूम लगता था
बड़ा मजबूर लगता था बडा मासूम लगता था
जब मारा पीठ में खंजर मुझे बेहाल कर गया
शनिवार, 27 नवंबर 2021
खाली हाथ बिना जेब जल जाना है
भविष्य पढो
सोमवार, 22 नवंबर 2021
संघर्ष ही जीवन है
रविवार, 21 नवंबर 2021
अंग भी बोलते है कभी
चिडिया उड़,मैना उड़ ।
शनिवार, 20 नवंबर 2021
भगवान नाराज होंगे
शुक्रवार, 12 नवंबर 2021
टूटा पत्ता
चल पडूंगा पूरी ऊर्जा के साथ
रविवार, 7 नवंबर 2021
गोवर्धन और कृष्ण
रविवार, 31 अक्टूबर 2021
बचा सको तो बचाओ अपनो को
शनिवार, 30 अक्टूबर 2021
जिंदगी अपनो की अमानत है
सोमवार, 18 अक्टूबर 2021
राजनीति व्यापार हो गयी
रविवार, 17 अक्टूबर 2021
मुल्क को बस सताए जा रहे है
बाते बस बाते बनाये जा रहे है
सभी को बस सताए जा रहे है
जहन्नुम जिंदगी को कर दिया है
बेशरम मुस्कराये जा रहे है
वादे क्या किये थे तब सभी से
अब जुमले बताये जा रहे है
कोविड से तो लाखो मर गये थे
ये तो भाषण सुनाये जा रहे है
लाखो मजदूर निकले थे घरो से
उन पर डंडा बजाये जा रहे है
चेहरे पर शिकन इनके कहा है
मौत के वजहें गिनाये जा रहे है
गांधी को रोशनी दुनिया ने माना
ये गोडसे को चमकाए जा रहे है ।
मैंने कहा मिलते नहीं
मैंने कहा मिलते नहीं
उसने कहा की क्यों मिले
मैंने कहा बस चाय पर
उसने कहा काफी पसंद
मैंने कह वो ही सही
उसने कहा रहने ही दो
मैंने कहा ऐसा भी क्या
उसने कहा ऐसा भी क्या
कि ये भी सही वो भी सही
टिकते नहीं तुम चाय पर
तो भरोसा तुम पर क्यों
कल भी टिकोगे या भगोगे
मैंने कहा वादा रहा
उसने कहा ज्यादा रहा
जाने ही दो तुम भी चलो
किसी और को देखो कही
उससे मिलो पर अब टलो